Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रियों के नाम PM मोदी ने लिखा पत्र; बाबा बर्फानी के भक्तों से ये 5 संकल्प लेने का किया आग्रह

अमरनाथ यात्रियों के नाम PM मोदी ने लिखा पत्र; बाबा बर्फानी के भक्तों से ये 5 संकल्प लेने का किया आग्रह, 57 दिन चलेगी यात्रा

PM Narendra Modi Wrote Letter To Amarnath Pilgrims Yatra Begins

PM Narendra Modi Wrote Letter To Amarnath Pilgrims Yatra Begins

Amarnath Yatra 2026: जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार 3 जुलाई 2026 से 'पवित्र अमरनाथ यात्रा' शुरू हो गई है. पहलगाम और बालटाल बेस कैंप से यात्रियों के पहले जत्थे को बाबा बर्फानी की गुफा की ओर रवाना कर दिया गया है. 'हर-हर महादेव' और 'जय बाबा बर्फानी' के जयकारों के साथ शिवभक्त बेहद उत्साह और श्रद्धाभाव से भरे हुए नजर आए. बता दें कि सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमरनाथ के पूरे यात्रा रूट पर भारी संख्या में जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और पैरामिलेट्री फ़ोर्स के हथियारबंद जवान और कमांडों तैनात किए गए हैं. चप्पे-चप्पे पर आधुनिक सुरक्षा उपकरणों के साथ पैनी नजर रखी जा रही है. यात्रा मार्ग पर स्नाइपर भी एक्टिव हैं.

अमरनाथ यात्रियों के नाम PM मोदी ने लिखा पत्र

इधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमरनाथ यात्रा शुरू होने पर श्रद्धालुओं के नाम एक पत्र लिखा है. इस पत्र में पीएम मोदी ने अमरनाथ यात्रियों को शुभकामनाएं दी हैं और कहा कि पवित्र अमरनाथ यात्रा में सम्मिलित होना अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य है. उन्होंने कहा कि बाबा बर्फानी के प्रत्यक्ष दर्शन करना शिवभक्तों के लिए जीवन का एक अत्यंत शुभ और अविस्मरणीय अनुभव है. भारत के अलग-अलग प्रांतों से, अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले और विविध परंपराओं को मानने वाले लोग, महादेव के दर्शन का संकल्प लेकर इस यात्रा को पूरा करते हैं. बाबा बर्फानी के पवित्र धाम में भारत की विविधता में एकता का अद्भुत स्वरूप भी देखने को मिलता है. वहीं पीएम मोदी ने अमरनाथ यात्रियों से 5 संकल्प लेने को कहा है और सुरक्षा के लिए पुलिस, सेना और पैरामिलेट्री फ़ोर्स का आभार जताया है.

प्रधानमंत्री मोदी का पूरा पत्र यहां पढ़िए

प्रधानमंत्री मोदी ने अमरनाथ यात्रियों के नाम जारी पत्र में लिखा, ''प्रिय श्रद्धालुओं हर हर महादेव! जय बाबा बर्फानी!, जम्मू-कश्मीर में पवित्र अमरनाथ यात्रा में सम्मिलित होना, अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य होता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन हुई प्रथम पूजा के साथ ही भक्तों के लिए बाबा बर्फानी के दर्शन का क्रम शुरू हो जाता है। देश के कोने-कोने में श्रद्धालु इस पावन यात्रा में सम्मिलित होने के लिए तत्पर रहते हैं। हर वर्ष बाबा बर्फानी के प्रत्यक्ष दर्शन का यह अवसर, लाखों शिवभक्तों के लिए जीवन का एक अत्यंत शुभ और अविस्मरणीय अनुभव होता है। मैं इस वर्ष यात्रा के इस अवसर पर आप सभी शिवभक्तों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।''

''बाबा अमरनाथ के दर्शन की यह यात्रा, भारत की आध्यात्मिक यात्रा परंपरा का एक शाश्वत अध्याय है। हर वर्ष पूरे विश्व से सनातन संस्कृति को मानने वाले लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में सम्मिलित होने के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं। अलग-अलग प्रांतों से, अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले और विविध परंपराओं को मानने वाले लोग, महादेव के दर्शन का संकल्प लेकर इस यात्रा को पूरा करते हैं। इन दो महीनों के दौरान, बाबा बर्फानी के पवित्र धाम में भारत की विविधता में एकता का अद्भुत स्वरूप भी देखने को मिलता है।''

''बीते कई दशकों से, श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड और जम्मू-कश्मीर सरकार बहुत कुशलता और सेवा भाव से यात्रा का प्रबंधन करते आ रहे हैं। इसके साथ ही, यात्रा को सुरक्षित संपन्न कराने में हमारे प्रशासन और सुरक्षाबलों की भी बहुत बड़ी भूमिका रहती है। इस वर्ष भी हजारों साथी इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। मैं इस अवसर पर भारतीय सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस, आईटीबीपी, बीएसएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े चिकित्सकों और कर्मियों, प्रशासन के अधिकारियों, सफाई मित्रों तथा भक्तों की सेवा में जुटे हर साथी का हृदय से अभिनंदन करता हूं।''

''बाबा बर्फानी के धाम की यह यात्रा, हमें जम्मू-कश्मीर के आतिथ्य भाव और देशभर से आए भक्तों के समर्पण का भी दर्शन कराती है। यात्रा के हर आयोजन में, जम्मू-कश्मीर के हजारों स्थानीय नागरिक श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत करते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले असंख्य भक्त भी, पवित्र गुफा और यात्रा मार्गों पर भंडारों और लंगरों का संचालन करते हैं। निःस्वार्थ सेवा की यह भावना, हमारी सनातन संस्कृति और सर्वे भवन्तु सुखिनः के आदर्श की सजीव अभिव्यक्ति है।''

''इस वर्ष मैं अमरनाथ यात्रा पर जा रहे सभी श्रद्धालुओं से कुछ संकल्पों का आग्रह करना चाहता हूं।''

  • पहला संकल्प - हम अमरनाथ यात्रा के दौरान स्वच्छता के नियमों का पालन करें और पूरे यात्रा मार्ग में स्वच्छता बनाए रखने में अपना योगदान दें।
  • दूसरा संकल्प- हम प्रशासन के सभी आदेशों, यातायात के नियमों और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करें। यात्रा के दौरान बारिश की वजह से फिसलन और ठंड का विशेष ध्यान रखें।
  • तीसरा संकल्प- हम 'वोकल फॉर लोकल' की भावना से यात्रा के खर्च का कम से कम 10 प्रतिशत उपयोग स्थानीय उत्पादों को खरीदने में करें। इससे जम्मू-कश्मीर के परिवारों और युवाओं की आजीविका को भी बल मिलेगा।
  • चौथा संकल्प- हम बाबा अमरनाथ यात्रा के समापन दिवस, अर्थात रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाई या बहन को एक पौधा भेंट करें और 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को आगे बढ़ाएं।
  • पांचवां संकल्प- हम राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ पूरे वर्ष अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें और विकसित भारत के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें।

''मुझे विश्वास है कि बाबा अमरनाथ की दर्शन यात्रा, सनातन धर्म की आस्था, भारत की सांस्कृतिक एकता और सेवा की परंपरा का एक भव्य महोत्सव बनकर पूर्ण होगी। मेरी कामना है, बाबा अमरनाथ की असीम कृपा हम सभी पर बनी रहे। आपकी यात्रा सुरक्षित हो, मंगलमय हो और आपके जीवन में नई ऊर्जा, नई चेतना तथा नई आध्यात्मिक शक्ति का संचार हो। बाबा बर्फानी हम सभी को अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक समर्पित बनाएं, ताकि हम मिलकर विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध कर सकें। आप सभी को अमरनाथ यात्रा के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।''

12 जून को अमित शाह ने की हाईलेवल बैठक

देश के गृह मंत्री अमित शाह ने बीते 12 जून को दिल्ली के कर्तव्य भवन में एक हाईलेवल बैठक की थी। जिसमें गृह मंत्री ने अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा और तमाम तैयारियों के बारे में विस्तार से समीक्षा की और अधिकारियों से सारी जानकारी ली थी. गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली इस अहम बैठक में जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी (तब), आईबी चीफ, DG सीआरपीएफ, जम्मू कश्मीर के डीजीपी समेत अन्य उच्चाधिकारी मौजूद रहे थे। वहीं यह बैठक दो घंटे से ज़्यादा समय तक चली थी।

सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को दिया था बड़ा निर्देश

बैठक में गृह अमित शाह ने सभी अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था बेहद मज़बूत करने और अमरनाथ यात्रा के सुचारू और सुरक्षित संचालन के लिए बेहतर आपसी तालमेल सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। गृह मंत्री ने कहा था कि अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra 2026) पर जाने वाले प्रत्येक यात्री की सुरक्षा और सुगमता सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। यात्रियों (Amarnath Pilgrims) को परेशानी न हो इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जायें.

अमरनाथ यात्रा 2026 का पूरा शेड्यूल

अगर आप इस साल अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra 2026) का प्लान बना रहे हैं तो अब Baba Barfani के दर्शन को तैयार हो जाइए। 3 जुलाई से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा 57 या 58 दिनों तक चलेगी और श्रावण पूर्णिमा (रक्षा बंधन) के पावन अवसर (28 अगस्त 2026) पर समाप्त होगी। यानि इतने दिनों तक तीर्थयात्री पवित्र अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के अद्भुत दर्शन कर पाएंगे। अमरनाथ यात्रा के लिए एडवांस रजिस्ट्रेशन और मेडिकल प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है।

अमरनाथ यात्रा 2026 का रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

याद रहे कि अमरनाथ यात्रा में आप तभी शामिल हो सकते हैं जब आप इसके लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाएंगे। बिना रजिस्ट्रेशन आप यात्रा शुरू नहीं कर सकते हैं। आप चाहें तो खुद से श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड वेबसाइट https://jksasb.nic.in/ पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं और अगर नहीं करना आता है तो किसी भी ऑनलाइन कार्य सेंटर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए लंगर से लेकर रहने की व्यवस्था होगी।

बतादें कि, रजिस्ट्रेशन में श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की तरफ से आपसे बहुत सी जरुरी जानकारी मांगी जाएगी। यात्रा के लिए श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अपने नियम हैं जिनपर आपको हर हाल में खरा उतरना होगा। आपसे यहां हेल्थ संबंधी जानकारी भी ली जायेगी। हमारी सलाह है कि आप रजिस्ट्रेशन करने से पहले श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की वेबसाइट पर जाकर यात्रा संबंधी नियमों को एक बार जरूर पढ़ लें।

अमरनाथ यात्रा में सुरक्षा व्यवस्था होती है प्राथमिकता

अमरनाथ यात्रा में पहली प्राथमिकता सुरक्षा व्यवस्था होती है जो कि हर हाल में पुख्ता रखी जाती है। यात्रा के दौरान यहां भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाती है. सुरक्षाकर्मी एकदम चौकस रहते हैं और अपनी पैनी निगाह से पूरी घाटी पर होने वाली हर हलचल पर नजर रखते हैं। अमरनाथ यात्रा में हर हाल में यह तय किया जाता है कि घाटी में बाबा बर्फानी के दर्शन करने आने वाले भक्त सकुशल अपने घर लौट सकें।

दरअसल, जम्म-कश्मीर घाटी के बीच अमरनाथ यात्रा बेहद कठिनाई भरी तो है ही साथ ही आतंकी खतरा का भी एक अलग डर रहता है। फिलहाल, इस साल होने शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा में सुरक्षा और सुविधा के लिहाज कुछ और विशेष प्रबंध किये जा रहे हैं। मालूम रहे कि अमरनाथ यात्रा दो पारंपरिक रूटों से होकर गुजरती है। यह पवित्र यात्रा पहलगाम (अनंतनाग) और बालटाल (गांदरबल) दोनों मार्गों से होती हुई बाबा बर्फानी के दर तक भक्तों को ले जाती है.